Sunday, 25 January 2015

लघुकथा :- सहकर्मी
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रवि और आकाश दोनों बचपन के साथी थे और एक ही मोहल्ले में रहते थे साथ ही खेलकूद कर बड़े हुए । दोनों एक दूसरे पर जान छिड़कते थे । साथ-साथ स्कूल पास किया और अलग-अलग कालेजों से दोनों ने इंजीनीयरिंग की परीक्षा पास कर डिग्री हासिल की और इत्तेफ़ाक़ की बात है कि दोनों की नौकरी भी एक ही कंपनी में लगी । रवि बचपन से ही महत्वाकांक्षी था उसको हमेशा नंबर एक पर आने का एक जुनून ,नशा सा था। इसके विपरीत आकाश का सरल ह्रदय व लोंगों के प्रति उसके अपनापन ने उसको कंपनी के लोंगों के बीच लोकप्रिय बना दिया दिया था । रवि उसकी इस लोकप्रियता को पचा नहीं रहा था। मित्र होने के बावजूद वह उससे कहीं ना कही अंदर ही अंदर जलता था। और उसे अक्सर लोगों की नज़र से नीचे गिराने के अवसर ढूंढा करता था । अक्सर वीकेंड में दोनों बाहर घूमने जाते ,पार्टी शार्टी करते। इसी बीच करिष्मा ने कंपनी को ज्वाइन किया वह भी रवि की तरह महत्वाकांक्षी थी उसको भी नम्बर एक पर रहने की बीमारी ने अपने चंगुल में जकड़ रखा था । जल्दी ही तीनों अच्छे दोस्त बन गये । अब हर वीकेंड पर तीनों लोग देर रात तक पार्टी करते । मार्च के महीने में प्रायः हर कंपनी मे अप्रेजल होता है । शातिर दिमाग और ऊपर से खूबसूरत हुस्न किसी पर भी कहर ढहा सकता है । खूबसूरत लड़कियां रवि की कमजोरी थी पर करिश्मा तो खुद बखुद उसकी ओर खीचीं चली आ रही थी । और इस वीकेंड पर करिश्मा ने बाहर ना जाने के बजाय दोनों को अपने फ्लेट पर बुलाया। जाम के जाम छलक रहे थे । शराब आकाश की कमी थी । इस बात को करिश्मा बहुत जल्दी समझ गई थी । उसने एक तीर से दो निशाने लगाने की ठानी । जब पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी। उसने चुपचाप रवि के कान में कुछ कहा और एक पुड़िया रवि के हाथ में पकड़ा दी । रवि ने करिश्मा का इशारा समझ आकाश की ड्रिंक मे नशीली दवाई मिला दी । और अगले दिन जो हुआ वह आकाश और रवि के समझ के परे था उसने दोनों पर थाने में जाकर बलात्कार का मुकदमा ठोक दिया था । अब लड़की ने कोई बात कह सुनाई तो दुनिया आसानी से उसको पीड़िता समझ लेती है और समाज की सहानुभूति उसके प्रति हो ही जाती है । तुरन्त मीडिया का जमावड़ा आ खड़ा हुआ । कंपनी की रेप्यूटेशन दावँ में लगा देख रवि और आकाश को कंपनी से निकाल दिया जाता है और मुकदमा वापस लेने और अपना मुँह बंद रखने के लिये करिश्मा को कंपनी में पदोन्नति व अधिक वेतन की देने की पेशकश , उसकी इज्जत के एवज में, की जाती  है । आकाश इस शर्मिंदगी को बर्दाश्त नहीं कर पाता और एक दिन अपने पन्द्रह मंजिल के फ्लैट से छलांग लगा कर मौत को अपना लेता है । इधर कम्पनी करिश्मा को नये डिपार्टमेंट का हेड बना कर उसका ट्रांसफर विदेश में कर देती है और रवि आज भी एक नई नौकरी पाने के लिए दरबदर की ठोकर खा रहा है । आज कोई कंपनी उसे नौकरी देने को तैय्यार नहीं है । वह उस मनहूस पल को याद करके पछता रहा है जब उसने आकाश की ड्रिंक में नशीली दवा मिलाई थी । कहते है जो व्यक्ति दूसरों के लिये गड्ढा खोदता उसमें वह स्वयं गिर जाता है पर उसकी सहकर्मी करिश्मा कैसे गढ्ढा पार कर गयी यह रहस्य आज भी रवि के लिए पहेली बना हुआ है ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०

25/01/2015

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