Saturday, 10 January 2015

तिरस्कार

आज बहुत दिनो बाद वे दोनों भाई -बहन अपने माता पिता के साथ अपनी नानी के घर होली के अवसर पर आये थे।रात्रि पहर होलिका दहन करने के बाद दोनो बच्चे अपने ममेरे भाई के साथ अगले दिन की योजना बनाते हुये आपस में बतियाते हुये सो जाते है,अगले दिन सुबह वे लोग जल्दी उठ जाते है,अपनी अपनी पिचकारियो में रंग भरने लगे तभी एक हादसा हुआ कि मोहल्ले में एक बुर्जग की मौत हो जाती है ,और होली की सुबह त्योहार से मातम में बदल जाती है,बच्चे अपना मनमसोस कर चुपचाप टीवी से चिपक जाते है ,कुछ क्षणों बाद बच्चों के पिता अपनी साइकिल निकाल कर बच्चों को बाहर बुलाते हैं और उनसे पास के रिश्तेदार के वहाँ चलने को कहते हैं बच्चे चिडियों से चहकते हुये रास्ते भर रंग डालते हुये अपने चचेरे नाना के वहाँ पहुंचते है शुरुआत में तो सब कुछ औपचारिक ही था और पिता उनके नाना के घर पर आये रिश्तेदारों से मिलने में व्यस्त थे और बच्चे भी आपस में एक दूसरे पर रंग डाल रहे थे तभी बच्चों से एक गलती हो जाती है और वह रंग गलती से घर के अन्दर की दीवारों पर रंग डाल देते है ,बच्चों की इस हरकत के बारे में जब उनको पता चला तो भागते हुये बच्चों के पास आयें और रसीद दिये दो तमाचे मासूमों के गालों में भद्दी जबान के साथ कि तुम्हारें बाप ने कभी सपने ऐसा मकान देखा है क्या ?


(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित।
२५/१२/२०१४

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