Wednesday, 21 January 2015

लघुकथा:- पंचायत
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ठाकुर राम सिंह ,अपने गाँव के प्रधान हैं । बरसों से उनके ही परिवार का सदस्य ही अब तक प्रधानी करता हुआ आया है , बड़ा दबदबा है उनका पूरा अपने क्षेत्र में। अंजू ठाकुर की इकलौती बेटी थी ,देखने में बेहद खूबसूरत मानो मोम की गुड़िया । जो भी एक बार उसे देख ले तो बस उसे देखते ही जाये। एक तो खूबसूरत, ऊपर से जवानी ,बिलकुल आग में घी का काम करे । गाँव मे ही रहने वाला निचली जति का नवयुवक प्रताप जो अंजू की खूबसूरती पर पहले से ही फ़िदा था, मेले में एक बार दोनों की आँखे चार हुई और पहली ही नजर में दोनों एक दूसरे को अपना दिल दे बैठे । छुप-छुप के मिलने का सिलसिला कुछ दिनों तक यूँ ही चलता रहा । जब तक ठाकुर के कानों तक खबर पहुँचती दोनों ने भाग कर शादी कर ली । गाँव में यह खबर अब तक आग की तरह फ़ैल चुकी थी और ठाकुर यह जिल्लत बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था कि उसकी बरसों की कमाई धाक पर कोई यूँ ही पानी फेर देगा । आज ठाकुर के घर पर मजमा लगा है , पंचायत बुलायी गयी है । ,गाँव का थानेदार भी अपनी पलटन के साथ वहां मौजूद है । प्रताप के माँ-बाप रहम की भीख मांग रहें है । मुँह से निकला खून इस बात की गवाही था कि दोनों को बुरी तरह से पीटा गया था । अंत में फैसला हुआ की चूँकि प्रताप, ने निचली जाति का होते भी जानबूझ कर ठाकुर की इज्जत पर हाथ डाला और अंजू , जो कि ठाकुर की लड़की है उसने अपने समाज और परिवार की मान मर्यादा के विरूद्ध घृणित कार्य किया है अतः पंचायत दोनों को बराबर का दोषी मानते हुए सजाये मौत सुनाती है और साथ ही प्रताप के माँ-बाप का हुक्का पानी भी बंद कराने का तालिबानी फरमान जारी कर देती है । यह सब कार्यक्रम पुलिस की देख रेख में हुआ । कुछ सप्ताह बाद दो लोंगो की लाश ,जिनमें एक लड़का व लड़की थे ,पेड़ पर लटकी हुई पायी गयी । सबने एक सिरे से लाशों को पहचानने से इनकार कर दिया । पुलिस आई लाशों को पेड़ से उतारा गया पंचनामा हुआ आत्महत्या का केस बना । और लाशों को लावारिश घोषित कर तुरन्त उनका क्रियाकर्म भी कर दिया गया । ठाकुर आज बीमार है और मृत्यु शैय्या पर पड़ा अपनी ज़िदगी के आखिरी दिन गिन रहा है परंतु उसे अपनी हठधर्मिता पर तनिक भी मलाल नहीं है । वह आज भी उसी शान से अपनी मूछों को ताव देता है । वह आज भी अपने को अपनी बिरादरी, समाज व धर्म का ठेकेदार,रक्षक मानता है ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित I
लखनऊ । उ०प्र०
२२/०१/२०१५

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