Monday, 17 August 2015

जेनरेशन गैप 
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" हाय रब्बा आज कल की कुड़ियों को देखो तो सही ! , कैसे - कैसे कपडे पहनती हैं, दिन भर फोन में चिपकी रहती हैं ,  इनके मोबाईल मैसेजेस पढ़ो तो शर्म से आँखे धरती पर गड़ जाये । अभी पड़ोस के शर्माइन की लड़की ने अपनी कमर में दिल वाला टैटू गुदवा रखा है , बड़ी मटकते हुए घूम रही है है पूरे मोह्ल्ले में , अब यह कोई बात हुई !  दिल भी भला कमर में होता है क्या ? आजकल  बच्चो को कोई लाज शर्म रह ही नहीं गई है  । "  

सामने टीवी सीरयल देखती हुई और हाथों से मटर के दाने छीलती हुई राधा अपनी कालेज की सहेली शीला से गप्पें मार रही थी । 

" तो तू क्या कम थी अपने जमाने में , क्या- क्या गुल नहीं खिला रखें हैं तूने । देख मेरा मुँह ना खुलवा ..."

अरे हमारे जमाने और थे और यह ज़माना कुछ और है  , तू तो बिलकुल भोली है । "

कमरे में तान्या प्रवेश करती हुई बोली ! " मम्मा जमाने सब एक होते हैं , बस सोच सही होनी चाहिये "

हाय रब्बा अब यह बच्चे हमें सिखाएंगे .................?

( पंकज जोशी ) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ.प्र 
18/08/2015

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