Friday, 14 August 2015

प्रायश्चित
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अब्दुल्ला ने आतंकवाद का रास्ता छोड़ एक सामान्य नागरिक का जीवन बिताने का फैसला किया । 
आज जुमा है ,  वह नमाज करके जैसे ही उठा तो सामने उसने राशिद को खड़ा पाया । 

" क्या हुआ राशिद ऐसा बदहवास सा क्यों है ? , क्या बात ......... ? " इससे पहले कि वह कुछ बोलता , उसने उसके हाथ में एक पर्ची थमा दी , तेजी से पलटा और वहां से चला गया ।

पंद्रह अगस्त के दिन स्कूल में आतंक वादी हमला ! रह रह कर पर्ची में लिखे शब्द उसे याद आ रहे थे ।

स्कूल में आयोजन की जबरदस्त तैयारी चल रही थी । झंडा रोहण शुरू होने ही वाला था तभी उसने दूर से मानव बम फैजल को चिन्हित कर लिया । 

अब्दुल्ला की पैनी नजर दूर से  उसके ऊपर टिकी थीं ।

जब तक वह मंच तक पहुँचता ,  अब्दुल्ला उस पर भूखे शेर की तरह झपट पड़ा । 

मंच से दूर मैदान पर एक जोरदार धमाका हुआ ।

अब्दुल्ला की शहादत बेकार नहीं गई । सैकड़ो खिलते मासूम चेहरे इस बात के गवाह थे

( पंकज जोशी ) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ.प्र 
14/08/2015

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