Monday, 29 June 2015

हौसला
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कामिनी के एक्सीडेंट के बाद उसके एक पैर को काटना पड़ा । मानो उसके स्वप्नों की हत्या कर दी गई हो। वह एक अच्छी ट्रेकर थी और इस बार की ट्रेकिंग उसके लिये काफी मायने रखती थी ।

"बेटा पहले और अब में काफी अंतर है तुम अब पहले जैसी नहीं रही !! तो क्या माँ -पापा ज़िन्दगी भर अपाहिज बन कर दिन भर घर में हाथ पर हाथ धरे रहूँ , यह नहीं होगा मुझसे "।

उसके कोच ने भी उसे समझाने की कोशिश पर वह ना मानी और एक्सपीडिशन के लिए अपने को तैयार करने लगी ।

ट्रेकिंग में उसके संगी साथी सब उससे आगे चले जाते और वह धीरे -धीरे ऊपर चढ़ने की कोशिश करती रहती।

" अरे वह लंगड़ी क्या चोटी पर पहुंचेगी!!!! " एक सदस्य ने ताना मारते हुए कहा वह छप रही और अपने प्रयास में लगी रही कि अब तो सौ प्रतिशत तो दे के दिखाएगी सबको ।

चोटी पर पहुँचते पहुँचते सब की ताकत जवाब दे चुकी थी ।

 अब वह गर्व से भरी नजरों से चोटी से दूर क्षितिज का नजारा ले रही थी । आज ज़िन्दगी जीत चुकी थी ।

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