Thursday, 25 June 2015

कश्मकश
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पति के फालिज पड़ने के बाद गृहस्थी का सारा बोझ फूल सी कोमलांगना पर आ पड़ा था। घर में फांके पड़ने लगे ,आज तो अन्न का दाना भी घर में नहीं है , ऊपर से विधवा सास के ताने  ' अरी कलमुही आज खाने को कुछ देगी  कि तेरे बाप को बुलाना पड़ेगा !!! '

शादी के बाद  पहली बार उहापोह की स्थिति में फंसी  पड़ी थी वह कि घर से बाहर जाकर खाने का इन्तजाम करे या  घर पर ही ,  रहते हुए सबको फांके मारते मरते देख स्वयं  पंखे पर झूल जाए।

 घर की लक्ष्मण रेखा लांघ ली और अपने परिवार को भूख से मरने से बचा लिया ।

( पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ.प्र
25 /06/2015

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