Wednesday, 29 April 2015

दीवार - - पैसा - 1

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 " बापू कल से हम खेतों पर काम करने नहीं जायेंगे "- हरिराम

ने खाना खाते हुए अपना फरमान घर वालों को सुना दिया ।

 गॉव में गोबर से पुती हुई झोपड़ की चाहरदीवारी उसके जीवन में सुकून नहीं दे पा

 रही थीं

 “ क्या तू भी इस बुढापें में हमको औरों की तरह असहाय छोड़ कर विदेश चला

 जायेगा“ ?

अरे बापू कुछ सालों की ही तो बात है , पैसा कमाया और देश वापस

भाग्य से विदेश में उसे एक कन्स्ट्रक्शन कम्पनी में काम भी मिल गया ।

 और कुछ ही वर्षो में कुबेर उस पर ऐसे प्रसन्न हुए कि उसकी काया पलट हो गई ।

 वापस लौटा तो खुद की कंस्ट्रक्शन कम्पनी का मालिक हों गया, काम चल निकला

, अब चारों तरफ रुपये की बरसात होने लगी।

उसका धनिक होना रिश्तेदारों से दूरी का कारण बना ....

 आज वह जेल में बंद अपने अपने कर्मो की सजा भुगत रहा है

( पंकज जोशी ) सर्वाधिकार सुरक्षित।

लखनऊ । उ प्र


29/ 04/ 2015

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