Saturday, 4 April 2015

लघुकथा :-  सट्टा
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दो अक्टूबर, गांधी जयंती के पावन पर्व पर को मोहल्ले की समिति द्वारा आयोजित क्रिकेट मैच का फाइनल खेला जाना है । ग्राउंड तैयार हो चूका है । उससे एक दिन पहले विपक्षी टीम के कप्तान ने फाइनल में पहुंची पहली टीम के कप्तान की गर्ल फ्रेंड को पटा लिया ।
अब मैच शुरू हो चुका था , अपनी गर्लफ्रेंड को दर्शक दीर्घा में बैठी देख कर सोचा कि वह उसको चीयर करने आई है । जब भी उसकी बैटिंग आती वह लड़की अपने कार्य में संलग्न हो जाती , कभी फ्लाइंग किस तो कभी आँख मारती , अब तक तो बेचारा कप्तान भी हैरान परेशान हो चुका था, आखिर कब तक जुदाई बरदाश्त करता खुद को ही हिट विकेट कर लिया । उसके आउट होते ही गर्ल फ्रेंड ने अपने पर्स में एक पैकेट रखा और वहां से चलती बनी ।
वह घटना उस दिन असत्य की सत्य पर विजय का प्रतीक हो गई ।


(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित
लखनऊ उ०प्र०
26/03/2015

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