Sunday, 15 March 2015

लघुकथा :- स्टिंग ऑपरेशन
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उनका शहर में बहुत बड़ा नाम था , सोशलाइट जो थीं वह , बिना उनके हर महफ़िल बेकार थी। खुद को उन्होंने गरीबों का मसीहा जो बनाया था , चाहे पार्टी स्तर पर धरना प्रदर्शन हो , नशा उन्मूलन हो , महिला मुक्ति की बात या यौन उत्पीड़न हर क्षेत्र में उनकी बुलंद आवाज आम जनता को झकझोर देती थी ।

पर आज अचानक ऐसा क्या हुआ जो टीवी चैनल में उनके नाम के चर्चे आमोखास हो गये । आज मामला दूसरा है , बाजी पलट गई ,पांसे आज उल्टे पड़ गए हैं ,एक स्टिंग ऑपरेशन ने उनको देश की अपह्रत और सरहद पार से लाई गई मासूम लड़कियों के सौदागर के रूप में उन्हें अपने कैमरे में कैद कर लिया था ।
आज कोर्ट की पेशी के दौरान अपने भाषणों में महिलाओं की हमदर्द , सिंहनी के रूप में दहाड़ने वाली बहरूपिये को आज अपना चेहरा दुप्पट्टे से ढँकना पड़ रहा है , कचहरी के बाहर खड़ी पुलिस वैन उसको हवालात की सैर कराने के लिये तैय्यार है ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।

लखनऊ । उ०प्र०
15/03/2015

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