Sunday, 15 March 2015

लघुकथा :- खाप पंचायत
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कमसिन उम्र की अमीना का विवाह इशरत के साथ करीब आठ साल पहले हुआ था । भरा पूरा घर था सास ससुर व एक ननद भी थी जिसकी दो साल पहले ही शादी हुई थी । बहन की शादी के बाद माँ की देख भाल करने के लिये वह अमीना को गाँव छोड़ वापस शहर चला आया । पिछले साल माँ की अकस्मात् मौत के बाद वह अकेले शहर चला आया कि अच्छा घर मिलते ही वह गाँव की जमीन जायदाद को बेच कर अमीना और अब्बा को लेकर शहर ही बस जायेगा ।

एक दिन अमीना का फ़ोन उसके पास आया और उसने उससे तुरंत गाँव आने को कहा । वापस गाँव लौटने पर उसने रो रो कर अपने साथ उसके बाप द्वारा ढाये गये शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न को तबसीर से बताया । पीठ पर पड़े चोट के नीले निशान और ऊपर से उसके माँ बनने की बात सुन कर इशरत की आँखों में खून उत्तर आया ।
मामला पुलिस में दर्ज हुआ और कड़ाई से पूछताछ के बाद उसके बाप द्वारा अमीना का उसके द्वारा शारीरिक यौन उत्पीड़न व उसके पेट में बच्चा पलने की बात स्वीकार की ।
मामले को रफादफा करने के लिये गाँव वालों ने अगले ही दिन खाप पंचायत बैठा दी । और पंचायत ने अपना नायाब फैसला सुना दिया कि इशरत ने अमीना को तलाक देना होगा और उसकी शादी उसके बाप से करा दी जाय ।
खाप के फैसले के बाद अब अमीना इशरत की माँ हो गई और उसका नवजात शिशु अब उसका भाई है ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
13/03/2015

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