Sunday, 15 March 2015

लघुकथा :- गठ बंधन
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सिद्धान्त ने इंनजीयरिंग की पढ़ाई करने के लिए कालेज में दाखिला लिया । और जैसा हर कालेज ,स्कूल ऑफिस में देखा जाता है कि अक्सर दो ग्रुप बन जाते है । पर यहाँ तो उसका साथ देने वालों में कोई था ही नहीं सभी लड़के लड़कियां बड़े ही सम्भ्रान्त घरों से थे फर्राटे दार अंग्रेजी बोलने वाले ।

सिद्धांत के पिता एक मेडिकल स्टोर में मामूली से कर्मचारी थे । अतः सिद्धांत का सीधा साधा रहन सहन उन अमीर घराने के बच्चों के गले के नीचे नहीं उतरता था ।
सिद्धांत ने अपनी प्रतिभा के दम पर कालेज में एडमिशन लिया था । पहला सेमेस्टर का एग्जाम ख़त्म हुआ । सर्वोच्च अंक उसके खाते में आये । अब तो उसके शिक्षक भी उसकी विद्वता के मुरीद हो गए । कालेज के छात्र इसे मात्र एक इत्तेफ़ाक़ समझते रहे । पर जब दूसरे और तीसरे समेस्टर मे भी उसको सर्वोच्च अंक मिले ।
तो वही साथी जो कल तक उसके कपड़ो का उसके रहन सहन का मजाक बनाते थे । अब अपने पुराने गठ बंधन को सहर्ष छोड़ उसके साथ मित्रता करने की होड़ में लग गये ।

(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
13/03/2015

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