Monday, 9 March 2015

लघु कथा :-धोखा (पार्ट 2)
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अमित को माँ के गुज़र जाने के बाद अकेलेपन का अहसास ना हो इसलिये संभावना उसके साथ ही रहने लगी थी।

एक दिन अमित को बिजनेस के सिलसिले में बाहर जाना पड़ता है। काम खत्म कर वह संभावना से मिलने की तड़प में जल्दी घर लौट आता है।
घर पर उसको रोशन के कमरे से संभावना के हँसने की आवाज सुनाई पड़ती है और वह दबे पाँव रोशन के कमरे के अधखुले दरवाजे से जो देखता है .................उससे वह बुरी तरह टूट जाता है।
अपने कमरे की अलमारी खोल उससे कुछ निकालता है और अंदर से कमरा बंद कर लेता है।

कुछ मिनट बाद उसके कमरे से धाँय की आवाज आती है ।
दरवाजे से उसका खून रिस कर बाहर बह रहा होता है । सम्भावना के क़दमों तले।


(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित

लखनऊ । उ०प्र०
19/02/2015

3 comments:

  1. धन्यवाद आ . करुणावती साहित्य धारा जी

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  2. धन्यवाद आ . करुणावती साहित्य धारा जी

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