Wednesday, 4 February 2015

लघु कथा :- नेता गिरी
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अरे वाह भई क्या बात है भैरों जी क्या खूब नेतागिरी करते हैं आप , एक सोशलाइट पार्टी में शहर के जाने माने उद्योगपति नारायण जी ने भैरों जी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा । दिन भर गांधी टोपी व खद्दर का कुर्ता पहनने वाले नेता जी आज शानदार जीन्स और पोलो शर्ट में तो पक्के अंग्रेज नज़र आ रहे थे।

"पार्टी फण्ड मे पैसे हम आपसे यूँ ही नहीं लेते नारायण जी सरकार किसी भी पार्टी की क्यों ना आ जाये शासन में सिक्का तो हमारा ही चलेगा।"
और आप तो हमारे अपने हैं । नशे में चूर नेता जी अपने ही अंदाज में बोले चले जा रहे थे।
संग़ठन को मजबूत करने के लिए कल पार्टी के प्रमुख गण हमारे शहर पधार रहे हैं आपसे एक विनती है हमारी नारायण राव जी उनकी रात की पार्टी में कुछ देशी विदेशीं ..........आप समझ रहें हैं ना हम क्या कहना चाह रहे हैं भाईसाहब ............
"अरे भैरों जी कुत्ते की दुम भी कभी सीधी होती है जो आप की होगी ........सैम्पल आपके पास पहुँच जायेगा आज अगर पसन्द ना आये तो कहियेगा " नारायण जी ने प्रत्युुतर दिया । अरे कैसी बात कर रहे हैं , अरे आप की पसन्द और हमारी पसन्द मैं कोई फर्क थोड़ो है। इस बार का टिकट अगर हमें मिल गया तो कांट्रैक्ट आपकी फर्म को ही ...........
(पंकज जोशी ) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
03/02/2015


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