Thursday, 5 February 2015

लघुकथा :- मार्गदर्शन
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" सब लोग तो जा रहें हैं तो तू क्यों नहीं चल रही हमारे साथ माधवी "शांता बाई ने कहा।
कैसे चलूँ घर का कितना काम है और इनसे भी तो अभी नहीं पूछा। अरी पूछना क्या है सत्संग मे ही तो जा रहे हैं सुबह आ जाएंगे । अरे देखे तेरे को कोई बच्चा भी नहीं है बड़े पहुंचे हुए संत है , हो सकता है उनके दर्शन मात्र से तुझे पुत्र रत्न की प्राप्ति हो जाये । तू ठहर यहीं मैं तेरी सास को बता कर आती हूँ कि माधवी हमारे साथ सत्संग मे जा रही है सुबह आयेंगे ।
सत्संग खत्म हो चुका था और महाराज जी प्रसाद वितरण कर रहे हैं तभी उनकी नज़र माधवी की कंचन काया पर पड़ती है । और वह शांता बाई को किनारे बुला कर पूछते हैं ।
प्रसाद वितरण उपरान्त शांता बाई माधवी को किनारे बुलाती है । और महाराज से मिलवाती है । महाराज जी इतने सालों बाद भी इसको बच्चा नहीं है अगर इस गरीब की गोद भर जाती ...............कुछ ना कुछ उपाय या मार्गदर्शन तो आपको करना ही पड़ेगा .................. हाँ महाराज अगर कोई उपाय या मार्ग दर्शन आप कर देते माधवी ने शांता की हाँ मे हाँ मिलाते हुए कहा
ठीक है कुछ सोचते हैं तुम तब तक यह प्रसाद ग्रहण करो परमात्मा ने चाहा तो सब ठीक हो जाएगा महाराज ने उसके गोरे गालों पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा 
अगली सुबह दोनों हँसते हुए अपने घर पहुंची और माधवी ने अपने कमरे में महाराज जी के मार्ग दर्शन अनुसार उनका चित्र को टांग उसकी पूजा अर्चना शुरू कर दी ।
कुछ ही महीनों बाद माधवी को एक पुत्र रत्न हुआ और नामकरण के दिन महाराज जी के नाम पर उसका नाम सत्य नारायण रखा
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
०५/०२/२०१५

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