Wednesday, 4 February 2015

लघुकथा:-भ्रष्टाचार और  हम
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प्राइम टाइम में आप सबका खुले दिल से हम खैर मकदम करते है । हर हफ्ते की तरह इस बार भी हम आपसे एक नए विषय के साथ रूबरू हो रहे हैं और आज का मुद्दा है "भ्रष्टाचार और हम" आज इस चर्चा में विभिन्न सियासी दलों के वक्ता हमारे साथ यहाँ उपस्थित है ।

सब बकवास सिंह साहब ने चिल्लाते हुए रिमोट को टीवी पर फेकते हुए बोले " सब चोर हैं बिके हुयें हैं एक दूसरे के खिलाफ भ्रष्टाचार का नाम लेते हुये चुनाव लड़ते है और जैसे ही चुनाव जीतते हैं वैसे ही इनके रंग बदल जाते है "गिरगिट की तरह"
आज तक मैंने इन लोंगो की जेबों को गरम करने के लिए क्या नहीं किया तलवे चाटे , रिश्वत खाई ।
"आज जब मैं ससपेंड हूँ तो यह हमारी मदद नहीं कर टीवी पर नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं।"
अपने चेहरे को अपने हाथों से मलते हुए प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी साहब जो विगत दो वर्षोँ से आबकारी घोटाले में निलंबित , डाइनिंग टेबल ग्लास में विस्की उड़ेलते हुए बके चले जा रहे थे ।
(पंकज जोशी ) सर्वाधिकार सुरक्षित I
लखनऊ । उ० प्र०

04/02/2015

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